बा'द ख़ूँ-रेज़ी के मुद्दत बे-हिना रंगीं रहा
हाथ उस का जो मिरे लोहू में गुस्ताख़ाना था
“After the bloodshed, for a long time, the color remained untainted, The hand that was reckless in my blood.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
खून-खराबे के बाद काफी समय तक, उस हाथ का रंग बिना निशानी के रहा, जो मेरे खून में बदतमीजी करता था।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरे ज़ख्म की बात करता है। शायर कहते हैं कि चाहे हमने कितना भी दर्द सहा हो, कितनी भी 'खूँ-रेज़ी' (पीड़ा) झेली हो, लेकिन उस हाथ पर कोई दाग नहीं लगा। वो हाथ जो मेरे खून में गुस्ताख़ाना था, वो आज भी बेदाग है। इसका मतलब है कि दर्द देने वाले को अपने किए का कोई अफसोस नहीं, या शायद उसे हमारी पीड़ा से कोई मतलब ही नहीं था। यह बेपरवाह दिल का इज़हार है।
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