याद अय्यामे कि अपने रोज़ ओ शब की जा-ए-बाश
या दर-ए-बाज़-ए-बयाबाँ या दर-ए-मय-ख़ाना था
“O, whether it was the door of the desert, or the door of the tavern, in my memory, every day and night was a path to you.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
याद है कि अपने रोज़-ओ-शब की जा-ए-बाश, या दर-ए-बाज़-ए-बयाबाँ या दर-ए-मय-ख़ाना था। (यानी, मुझे याद है कि मेरे हर रोज़ और हर रात का मार्ग, चाहे वह रेगिस्तान का दरवाज़ा हो या मयखाने का दरवाज़ा, सिर्फ़ तुम तक जाता था।)
विस्तार
यह शेर यादों की उस गहराई को दर्शाता है जो हमारे जीवन के हर पल में बस जाती है। शायर पूछते हैं कि ये यादें कहाँ से आती हैं—क्या ये बंजर रेगिस्तान के द्वार से आती हैं, या फिर मय-ख़ाने की मस्ती से? यह एक अद्भुत द्वंद्व है, जो बताता है कि यादें कभी खालीपन की बेचैनी होती हैं, तो कभी नशीले नशे का एहसास!
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