डर ज़ुल्म से कि उस की जज़ा बस शिताब है — मीर तक़ी मीर
“I fear the tyranny, for its reward is merely coolness/calmness; Has the action arrived, or has the reward already been achieved?”
अर्थ
डर ज़ुल्म से कि उस की जज़ा बस शिताब है। आया ‘अमल में याँ कि मुकाफ़ात हो गई।
विस्तार
यह शेर सिर्फ दर्द की बात नहीं करता, यह तो ज़िंदगी के तजुर्बे की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि हमें ज़ुल्म से नहीं डरना चाहिए.... असली डर तो उस बात का है कि जो सज़ा मिल रही है, वो असल में सज़ा नहीं, बस एक दिखावा है। और ये सवाल करना कि क्या हमने जो किया, वो हमारे अपने अमल की वजह से था, या हमें ये मुकाफ़ात तो वैसे भी मिल ही जाना था। ये एक गहरी फ़लसफ़ा है।
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