गर्दिश निगाह-ए-मस्त की मौक़ूफ़ साक़िया — मीर तक़ी मीर
“The beloved's intoxicated gaze paused, O cupbearer, Even the mosque suffered the decay of the Shaikh.”
अर्थ
मस्त की घूमती निगाहें रुक गईं, हे साक़िया; शाइख़ जी की ख़राबी से तो मस्जिद भी खराब हो गई।
विस्तार
इस शेर में एक बहुत ही ज़बरदस्त बदलाव है! पहले मिसरे में, शायर एक ऐसे नशे की बात कर रहे हैं जो निगाहों में है, एक ऐसी मदहोशी जो रुकती ही नहीं.... और फिर, अचानक वह उस मदहोशी से निकलकर, एक टूटी हुई मस्जिद की तरफ़ इशारा करते हैं। यह एक बहुत ही गहरा व्यंग्य है! शायर कहते हैं कि ज़िंदगी के बड़े-बड़े नशे और प्रेम की बात... सब बेकार है, असली सच्चाई तो दुनिया की ख़राबी में है।
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