ख़त से निकले है बेवफ़ाई-ए-हुस्न
इस क़दर तो सवाद है हम को
“From the letter, the infidelity of beauty has emerged, Such is the depth of our suffering.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
पत्र से सौंदर्य की बेवफ़ाई निकल आई है, हमारे दुख की गहराई इतनी है।
विस्तार
यह शेर उस गहरे दर्द को बयां करता है जब हमें यह एहसास होता है कि जिस सुंदरता पर हम फिदा हैं, वही हमारे लिए सबसे बड़ी मुसीबत है। शायर कहते हैं कि हुस्न की बेवफ़ाई.... उसके ख़त से निकली है। यानी, जो चीज़ हमें सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है, वही हमें सज़ा भी देती है। यह इश्क़ का कड़वा सच है।
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