काश उठीं हम भी गुनहगारों के बीच — मीर तक़ी मीर
काश उठीं हम भी गुनहगारों के बीच
हूँ जो रहमत के सज़ा-वारों के बीच
“If only I too could awaken among the sinners, I am, who am among those punished by mercy.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अर्थ यह है कि काश मैं भी गुनाहगारों के बीच जाग पाती, क्योंकि मैं तो रहमत के सज़ा-पाने वालों के बीच हूँ।
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे विरोधाभास (paradox) को बयां करता है। शायर कहते हैं कि वे एक ऐसी जगह पर हैं, जहाँ उन्हें 'रहमत की सज़ा' मिल रही है। यानी, उनका दर्द बहुत मीठा, बहुत गहरा है। वे चाहतें हैं कि वे गुनहगारों के बीच हों, क्योंकि उन्हें लगता है कि शायद खुलकर गुनाहगार होना, इस रहस्यमयी, मीठे दर्द से कहीं बेहतर है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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