जब कौंदती है बिजली तब जानिब-ए-गुलिस्ताँ
रखती है छेड़ मेरे ख़ाशाक-ए-आशियाँ से
“When lightning flashes across the garden's expanse, It plays with my little nest of dwelling.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब बिजली कौंदती है, तब वह गुलिस्तान की तरफ़ जाती है और मेरे छोटे से घोंसले से छेड़छाड़ करती है।
विस्तार
यह शेर प्रकृति के एक बहुत ही ख़ूबसूरत और गहरे एहसास को बयां करता है। बिजली का चमकना यहाँ सिर्फ़ एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह जीवन के अचानक आने वाले तूफ़ान या भावनात्मक उथल-पुथल का प्रतीक है। शायर कहते हैं कि जैसे ही दुनिया में कोई बड़ा ड्रामा होता है, हमारा अपना सुरक्षित कोना—हमारा आशियाना—भी उस ड्रामा से बेख़बर नहीं रहता। यह हमें सिखाता है कि सुरक्षा का एहसास कितना भी मज़बूत क्यों न हो, बाहरी दुनिया का असर हमेशा रहता है।
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