क्या ख़ूबी उस के मुँह की ऐ ग़ुंचा नक़्ल करिए
तू तो न बोल ज़ालिम बू आती है वहाँ से
“What beauty is there in her face, O little imitator, do not copy it; Do not speak, O cruel one, for the scent comes from there.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हे छोटे नक़ल करने वाले, उसके चेहरे की क्या ख़ूबी है, उसे नक़ल मत करो। ज़ालिम, तू कुछ मत बोल, क्योंकि महक वहाँ से आती है।
विस्तार
यह शेर नक़ल और मौलिकता की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि किसी के मुँह की ख़ूबसूरती को नक़ल करना भी बेकार है। ग़ुंचा, तू तो ज़रा बोल भी मत, क्योंकि असली इत्र.... असली ख़ुशबू तो वक़ई उस जगह से आती है। यह शेर बताता है कि कोई भी हुनर या अदाकारी इतनी मौलिक होती है कि उसे दोहराया नहीं जा सकता।
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