गिर्या-ए-शब से बहुत आँख डरे है मेरी — मीर तक़ी मीर
“My eyes have feared the grave-like darkness greatly, For my feet do not stop in the water of another life.”
अर्थ
मेरी आँखें कब्र जैसी अंधेरे से बहुत डर चुकी हैं, क्योंकि मेरे पैर दूसरे जीवन के पानी में नहीं रुकते।
विस्तार
मिर्ज़ा तक़ी मीर यहाँ एक गहरी बेचैनी का मंज़र पेश करते हैं। पहली लाइन बताती है कि उनका डर इतना गहरा है कि रात के सन्नाटे में भी उन्हें चैन नहीं आता। यह एक अंदरूनी उथल-पुथल है, एक डर जो बाहरी शांति से भी नहीं मिटता। दूसरी लाइन इसे और गहरा कर देती है; उनके कदम 'किसी और के पानी' में रुकते नहीं हैं। इसका मतलब है कि वे भावनात्मक रूप से ऐसे लोगों की दुनिया में भटक जाते हैं, जहां उनका कोई अधिकार नहीं है। यह बेचैन दिल की शायरी है, जो हमेशा खोज में रहता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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