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ग़म-ए-हिज्र रक्खेगा बे-ताब दिल को
हमें कुढ़ते कुढ़ते कुछ आज़ार होगा

The heart, burdened by the pain of separation, Will be worn out by the torment, and suffer much.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

विरह का दर्द बेताब दिल को रखेगा; हमें कुढ़ते-कुढ़ते कुछ आज़ार होगा।

विस्तार

यह शेर विरह के गहरे दर्द को बयां करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि जुदाई का गम इतना गहरा है कि दिल बेताब रहता है। शायर कहते हैं कि शायद इस बेचैनी और तड़प को सहते-सहते... हमें किसी तरह एक सुकून मिलेगा। यह एहसास है कि दर्द इतना आम हो जाएगा कि वह खुद ही एक आदत बन जाएगा।

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