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यूँ कानों-कान गुल ने जाना चमन में आह सर को पटक के हम पस-ए-दीवार मर गए

The bloom did not hear the sigh in the garden's ear, With head upon the floor, we died behind the wall, my dear.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

फूल ने कानों-कान यह आह नहीं सुनी, और हम दीवार के पीछे सिर पटककर मर गए।

विस्तार

यह शेर बहुत ही गहरे दर्द को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मेरा दर्द इतना गहरा था कि गुलशन में खिले फूल भी मेरी आह नहीं सुन पाए। यानी मेरा गम इतना निजी था.... कि दुनिया को पता ही नहीं चला। और इस अनसुने दर्द के बोझ तले.... मैं दीवार से सिर पटककर मर गया। यह तन्हाई और दर्द का मंज़र है।

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