होता नहीं है उस लब-ए-नौ-ख़त पे कोई सब्ज़
ईसा ओ ख़िज़्र क्या सभी यक-बार मर गए
“No freshness ever blooms upon those lips of nine-pearls, O Isa and Khizr, have all of you died only once?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
वह नौ-मोतियों जैसे होंठ कभी भी ताज़गी से नहीं खिलते। ऐ ईसा और खिज़्र, क्या आप सभी केवल एक बार मरे हैं?
विस्तार
यह शेर न सिर्फ़ मुहब्बत की बात करता है, बल्कि वजूद की सच्चाई पर सवाल उठाता है। शायर पूछते हैं कि क्या कोई नज़दीकी, कोई ताज़गी... हमेशा के लिए बनी रह सकती है? 'लब-ए-नौ-ख़त' पर कोई सदाबहार हरियाली नहीं हो सकती। और फिर ये सवाल कि क्या ईसा और खिज़्र जैसे लोग भी केवल एक बार मरे थे? यह शेर हमें सिखाता है कि नश्वरता (mortality) हर चीज़ का हिस्सा है, यहाँ तक कि जो चीज़ें अमर मानी जाती हैं, वे भी समय के चक्र से नहीं बच सकतीं।
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