पास-ए-नामूस-ए-मोहब्बत था कि फ़रहाद के पास
बे-सुतूँ सामने से अपने उठाया न गया
“The veil of love's honor was so strong, that Farhad could not lift it from before him.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
प्रेम के सम्मान का पर्दा इतना प्रबल था कि फ़रहाद अपने सामने से उसे उठा नहीं पाया।
विस्तार
यह शेर मुहब्बत की इज़्ज़त और शोहरत का ज़िक्र करता है। शायर कहते हैं कि मुहब्बत का नशा इतना गहरा था कि फ़राज़, जो सामने मौजूद था, वह अपनी नज़रें ऊपर नहीं उठा पाया। यह नज़रों का झुक जाना, सिर्फ़ देखना नहीं है, बल्कि मुहब्बत के असर का वह जादू है जो किसी को अपनी जगह पर रोक देता है।
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