जब रोने बैठता हूँ तब क्या कसर रहे है — मीर तक़ी मीर
जब रोने बैठता हूँ तब क्या कसर रहे है
रूमाल दो दो दिन तक जूँ अब्र तर रहे है
“When I sit to cry, what deficiency remains? Just a handkerchief to wipe away the tears, day after day.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
जब मैं रोने बैठता हूँ, तो क्या कमी रह जाती है? बस एक रुमाल चाहिए जो दिन-प्रतिदिन मेरे आँसू पोंछ सके।
विस्तार
यह शेर गहरे और लगातार दर्द को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि रोना उनके लिए कोई नई बात नहीं, यह तो एक आदत बन गई है। उनके गम की गहराई इतनी ज़्यादा है कि आँसुओं को पोंछने के लिए उन्हें दो दिन तक रुमाले की ज़रूरत है। यह दर्द की उस उस स्थिति को दिखाता है, जहाँ आँसू रुकते ही नहीं हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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