हर सू सर-ए-तस्लीम रखे सैद-ए-हरम हैं वो सैद-फ़गन तेग़-ब-कफ़ ता किधर आवे

“Everywhere, the Sayyids of the sacred precinct offer their heads in submission; those Sayyids are like a sword and a shield, where can they be found?”

— मीर तक़ी मीर
अर्थ

हर जगह सैद-ए-हरम को सर झुकाकर नमन करते हैं; वो सैद-फ़गन तेग़-ब-कफ़ हैं, कि उन्हें कहाँ खोजा जाए।

विस्तार

यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की अटूट श्रद्धा और जोश को बयान करता है। शायर कहते हैं कि हर जगह 'सैद-ए-हरम' (पवित्र स्थान के सम्मानित व्यक्ति) का सम्मान होता है। लेकिन, असली चुनौती तो 'सैद-फगन' की है—जो तलवार से भी लड़ेगा और नंगे हाथों से भी। मीर साहब कहते हैं कि इस योद्धा जैसी भक्ति को कहीं भी काबू करना या बांधना मुमकिन नहीं! यह एक ऐसे जज़्बे को सलाम है जो कभी झुकेगा नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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