भड़का था रात देख के वो शो'ला-ख़ू मुझे — मीर तक़ी मीर

भड़का था रात देख के वो शो'ला-ख़ू मुझे कुछ रू-सियह रक़ीब ने शायद लगाई बात

“Seeing the night, he was burning with passion for me, Perhaps some rival spoke a word to me.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

रात को देखकर वो शोला-ख़ू मुझमें भड़का था; शायद किसी प्रतिद्वंद्वी ने बात कह दी।

विस्तार

यह शेर एक गहरे और उलझे हुए इश्क़ को बयान करता है। शायर कह रहे हैं कि महबूब की निगाहों में जो शोला था, वो रात के अंधेरे में भी काफी था हमें बेचैन करने के लिए। और ये जो दूसरी बात है... ये रक़ीब का इशारा है! ऐसा लगता है जैसे महबूब की नज़रों के साथ-साथ, किसी तीसरे व्यक्ति ने भी बात शुरू कर दी। यह न सिर्फ़ इश्क़, बल्कि ईर्ष्या और बेचैनी का संगम है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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