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नुक़्ता-ए-ख़ाल से तिरा अबरू
बैत इक इंतिख़ाब की सी है

From the speck of nothingness, your grace, Is like a verse chosen with great care.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

नुक़्ता-ए-ख़ाल से तुम्हारा अबरू ऐसा है, जैसे किसी विशेष चयन से चुना गया कोई छंद।

विस्तार

देखिए, इस शेर में शायर ने ज़िंदगी और मौत की परिभाषा को ही बदल दिया है। वो कह रहे हैं कि मृत्यु का किनारा (नुक़्ता-ए-ख़ाल) भले ही कितना भी खतरनाक क्यों न हो, पर आपके कारण जो अपमान या बेइज्जती हुई है, वो उससे कहीं ज़्यादा भारी है। यह सिर्फ एक शायरी नहीं है, बल्कि एक दर्द है.... जो बताता है कि दिल को टूटने का ग़म, जान जाने के गम से भी ज़्यादा है। वाह!

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