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बार बार उस के दर पे जाता हूँ
हालत अब इज़्तिराब की सी है

Again and again, I go to his door, My condition is one of deep unrest.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मैं बार-बार उसके द्वार पर जाता हूँ, मेरी हालत अब बेचैनी जैसी है।

विस्तार

यह शेर एक आशिक़ के मन की बेचैनी को बयां करता है। शायर कह रहे हैं कि वह बार-बार महबूब के दरवाज़े पर जाते हैं, लेकिन उनकी हालत कैसी है? वह इज़्तिराब की है। यह उस बेचैनी को दिखाता है जब दिल किसी चीज़ को पाने के लिए बार-बार कोशिश करता है, पर उस कोशिश में ही एक गहरी घबराहट और बेचैनी समा गई होती है।

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