अबरू-ए-कज है मौज कोई चश्म है हबाब — मीर तक़ी मीर
अबरू-ए-कज है मौज कोई चश्म है हबाब
मोती किसी की बात है सीपी किसी का गोश
“The foam of the cage is some wave, the fountain is some spring, A pearl is someone's talk, the seashell is someone's flesh.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
अबरू-ए-कज है मौज कोई चश्म है हबाब। मोती किसी की बात है, सीपी किसी का गोश।
विस्तार
मीर तक़ी मीर ने यहाँ जीवन की नश्वरता का अद्भुत चित्रण किया है। शायर कहते हैं कि लहरों का झाग भी एक बुलबुला है, और मोती का चमकना भी किसी की बातों का असर है। यह शेर हमें सिखाता है कि दुनिया की हर खूबसूरती, हर कहानी, कितनी भी गहरी क्यों न लगे, अंत में एक अस्थायी भ्रम ही है। सब कुछ क्षणभंगुर है!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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