“Bringing the beauty of the eye like a narcissus flower, We sought the grace of seeing your face.”
कासा-ए-चश्म ले के जूँ नर्गिस, हम ने दीदार की गदाई की। इसका अर्थ है कि मैंने आँखों की सुंदरता को जैसे चश्मे में नरगिस फूल को धारण किया, वैसे ही आपके दीदार की कृपा माँगी।
यह शेर महबूब की मदहोश कर देने वाली खूबसूरती का वर्णन करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर ने महबूब की नज़र को एक ऐसे नरगिस से जोड़ा है, जिसके हाथों में एक नज़ारा हो। शायर कहते हैं कि उनका दीदार मिलना ही एक बड़ा एहसान है, एक ऐसी ख़ुशी जो किसी वरदान से कम नहीं।
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