दिल में उस शोख़ के न की तासीर
आह ने आह ना-रसाई की
“The charm of that flirtatious one did not touch my heart, My sighs were without the grace of melody.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
उस नटखट व्यक्ति के आकर्षण का मेरे दिल पर कोई असर नहीं हुआ, और मेरी आहें मधुर संगीत के बिना थीं।
विस्तार
यह शेर बताता है कि महबूब का नशा या उसका शोख़ व्यवहार, ये सब तो क्षणिक हैं। असली दर्द तो कहीं और है। यह दर्द है उस आह का, जो चैन से नहीं बैठती। यह आह ही है जो यादों का बोझ लिए, लगातार दिल में गुदगुदा करती रहती है। यह दर्द ही शायर की सबसे बड़ी सच्चाई है।
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