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ज़ोर ओ ज़र कुछ न था तो बार-ए-'मीर'
किस भरोसे पर आश्नाई की

If you possessed any strength or wealth, O Mir, on what assurance did you promise me?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

ज़ोर या दौलत कुछ न थी, तो ऐ मीर, किस भरोसे पर तूने आश्वासन दिया?

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरा सवाल उठाता है। शायर यहाँ पूछ रहे हैं कि अगर मेरे पास न दौलत है, न ज़ोर... तो फिर आपने मुझे किस भरोसे पर अपनी ज़िंदगी में शामिल किया? यह सिर्फ़ सवाल नहीं है, यह एक दर्द भरी तन्हाई है, जो बताती है कि रिश्ते अक्सर वजूद पर नहीं, बल्कि किसी दिखावे पर टिके होते हैं।

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