नसीम आई मेरे क़फ़स में अबस
गुलिस्ताँ से दो फूल लाई नहीं
“Naseem, come into my cage, now, Abs, I have not brought two flowers from the garden.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
नसीम, मेरे पिंजरे में आ, अबस। मैंने बगीचे से दो फूल नहीं लाए।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही नाज़ुक मायूसी को बयां करता है। 'नसीम' यानी वो हल्की सी हवा, जो खुशबू लेकर आती है और उम्मीदें जगाती है। शायर कहते हैं कि वो तो आ गई, लेकिन वो जो उम्मीद थी.... वो 'गुलिस्ताँ से दो फूल' के रूप में आनी थी.... वो नहीं लाई। यह अधूरापन है, दोस्तों! जब उम्मीदें पूरी नहीं होतीं.... तो दिल में एक खालीपन रह जाता है.... बस यही एहसास शायर ने बयां किया है।
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