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किताबत गई कब कि उस शोख़ ने बना उस की गड्डी उड़ाई नहीं

When did that mischievous one's writing cease, He did not let the bundle of her beauty fly.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

उस शरारती व्यक्ति ने कब अपनी लिखाई रोकी, वह उसकी खूबसूरती का गुच्छा उड़ाने नहीं दिया।

विस्तार

यह शेर उस मोहब्बत की बात करता है जो कभी जाती नहीं। शायर पूछ रहे हैं कि वह शरारती शख्सियत की याद या अहसास कब गया? जवाब है कि वह तो गया ही नहीं! ऐसा लगता है जैसे उसके जादू का बंडल (गड्डी) कहीं उड़ ही नहीं पाया। यह बताता है कि महबूब का असर इतना गहरा है कि वह रूह में बस जाता है और हमेशा के लिए रह जाता है।

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