बारे सरिश्क-ए-सुर्ख़ के दाग़ों से रात को — मीर तक़ी मीर
बारे सरिश्क-ए-सुर्ख़ के दाग़ों से रात को
बिस्तर पर अपने सोते थे हम भी बिछाए गुल
“With the stains of the crimson-dyed forehead, at night, upon the bed, we also spread the blossoms.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
बारे सरिश्क-ए-सुर्ख़ के दाग़ों से रात को, बिस्तर पर अपने भी गुल बिछाए थे।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही नज़दीकी और गहरे इश्क़ की तस्वीर खींचता है। शायर कह रहे हैं कि रात के समय, वो भी ऐसे ही बिस्तर पर सोते थे, जैसे किसी सुर्ख़ गुलाब के दाग़ों से बिछाया गया हो। यहाँ दाग़ सिर्फ़ निशान नहीं हैं, बल्कि वो इश्क़ का गहरा असर हैं। यह एहसास दिलाता है कि उनका जीवन और उनका आराम भी महबूब के प्यार की ख़ूबसूरती से चिह्नित था।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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