कजी औबाश की है वो दर-बंद
डाले फिरता है बंद शानों पर
“That locked door of Kaji Obash, Still casts its pall upon the splendid ranks.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
कजी औबाश का वह बंद दरवाज़ा अभी भी अपनी उदासी से शानदार शानों पर छा रहा है।
विस्तार
यह शेर घमंड और दिखावे की उस भावना को दर्शाता है, जो इंसान को खुद से घेर लेती है। 'दर-बंद' एक ऐसी सीमा है, जो किसी के अहंकार से बनी होती है। शायर कह रहे हैं कि कोई व्यक्ति अपनी शान, अपनी रुतबा, को ऐसे दिखाता है... जैसे वह सिर्फ उसी का है। यह एक तीखा तंज़ है उस घमंड पर, जो लोगों के बीच एक दीवार खड़ी कर देता है।
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