लोग सर देने जाते हैं कब से
यार के पाँव के निशानों पर
“Since when do people go to sacrifice their heads At the footsteps of a friend?”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
लोग कब से यार के पाँव के निशानों पर सिर देने जाते हैं।
विस्तार
यह शेर हमें समर्पण और वफ़ा की गहराई पर सोचने को मजबूर करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर पूछ रहे हैं कि... आखिर कब से इंसान अपना सर्वस्व, अपनी जान... महबूब के बस निशानों पर लुटाने लगा है? यह एक सवाल है... जो बताता है कि हमारी ये वफ़ादारी... कहीं हद से ज़्यादा तो नहीं हो गई!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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