याद में उस के साक़-ए-सीमीं की
दे दे मारूँ हूँ हाथ रानों पर
“In memory of his intoxicating company, I wish to strike with my hands on the wrists of the lovers.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
याद में उस के साक़-ए-सीमीं की, दे दे मारूँ हूँ हाथ रानों पर। (अर्थात: उसकी मादक संगत की याद में, मैं प्रेमियों के हाथों की कलाई पर प्रहार करना चाहती हूँ।)
विस्तार
यह शेर यादों के नशे को बयां करता है। शायर कहते हैं कि महबूब की यादें... किसी मादक नशा हैं। यह नशा इतना गहरा है कि शायर इसके लिए अपनी जान भी देने को तैयार है! वो कहते हैं कि इस याद को जीने के लिए, मैं योद्धाओं के हाथों... भी मरने को तैयार हूँ। यह इश्क़ की पराकाष्ठा है, जहाँ मौत भी एक तसल्ली लगती है।
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