दिल तसल्ली नहीं सबा वर्ना
जल्वे सब हैंगे दाग़ में गुल के
“The dawn is not a solace, for the blossoms are destined to bear stains of passion.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दिल को तसल्ली नहीं मिलती सुबह से, क्योंकि सभी फूल दाग़ों में ही गुल हैं।
विस्तार
यह शेर हमें सुंदरता और खामी के रिश्ते के बारे में बताता है। शायर कह रहे हैं कि किसी भी चीज़ की असली खूबसूरती उसके दाग़ में ही होती है। अगर कोई चीज़ एकदम दाग़ रहित, पूरी तरह से परफेक्ट होगी, तो उसकी अपनी पहचान और गहराई भी खत्म हो जाएगी। यह जीवन की एक बहुत गहरी बात है... कि हमारी कमियाँ ही हमें इंसान बनाती हैं, और ये निशान ही हमारी कहानी का हिस्सा हैं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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