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मत मानियो कि होगा ये बे-दर्द अहल-ए-दीं
गर आवे शैख़ पहन के जामा क़ुरआन का

Do not believe that this heartless people of religion Will come wearing the robes of the Quranic tradition.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

मत मानियो कि यह बेदर्द अहल-ए-दीन ऐसे ही होगा कि अगर कोई शैख़ पहनकर कुरान का लिबास आ जाए।

विस्तार

दोस्तों, यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरा सामाजिक आइना है। शायर हमें समझा रहे हैं कि किसी के बाहरी दिखावे पर भरोसा नहीं करना चाहिए। चाहे कोई कितना भी धार्मिक लगे, उसके इरादे दिल में कितने क्रूर हो सकते हैं। यह शेर हमें सतर्क रहना सिखाता है कि हर नक़ाब के पीछे एक सच छिपा होता है।

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