है दीन सर का देना गर्दन पे अपनी ख़ूबाँ
जीते हैं तो तुम्हारा ये क़र्ज़ अदा करेंगे
“Oh, the debt of giving a crown to the neck, oh, how precious it is; if we live, we shall repay this debt of yours.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
दीन सर का देना गर्दन पे अपनी ख़ूबाँ, जीवित हैं तो तुम्हारा ये क़र्ज़ अदा करेंगे। (अर्थ: यह कितना कीमती है कि दीन सर ने अपनी गर्दन पर ताज दिया, और यदि हम जीवित रहे, तो हम आपका यह क़र्ज़ चुका देंगे।)
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ एहसान की बात नहीं करता, यह ज़िन्दगी के क़र्ज़ की बात करता है। शायर कह रहे हैं कि जो भी ने उन्हें जीवन दिया है, उनकी ज़िंदगी उस क़र्ज़ को चुकाने के लिए है। यह कोई महज़ वादा नहीं है, यह एक इक़रार है! कि उनकी वजूद (existence) ही उस एहसान का बदला है। कितना गहरा एहसास है यह!
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