हम को दीवानगी शहरों ही में ख़ुश आती है
दश्त में क़ैस रहो कोह में फ़रहाद रहो
“In the cities, this madness feels beautiful to us; / In the wilderness, may Qais be happy, may Farhad be happy.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
हमें दीवानगी शहरों में ही अच्छी लगती है; दश्त में क़ैस खुश रहे, कोह में फ़राहाद खुश रहे।
विस्तार
देखिए, शायर यहाँ एक बहुत गहरी बात कह रहे हैं। उनका कहना है कि दीवानगी... यानी ये जो जुनून होता है न, ये जंगल या पहाड़ की सादगी में नहीं मिलता। ये तो शहरों की रौनक में, यहाँ की भीड़ में खिलता है। शहर एक मंच है, एक ऐसा माहौल है जहाँ दिल की हर धड़कन... एक कहानी बन जाती है। शायर ने बस यह बताया कि भावनाएं कहाँ और कैसे खुलकर ज़ाहिर होती हैं!
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
