क़द्र रखती न थी मता-ए-दिल
सारे आलम में मैं दिखा लाया
“My heart's worth was not esteemed, in all the world, I brought it to light.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
मतले-ए-दिल की कद्र नहीं थी, लेकिन मैंने उसे सारे आलम में दिखा दिया।
विस्तार
यह शेर आत्म-खोज की बात करता है। मिर्ज़ा तक़ी मीर कहते हैं कि दिल (या इंसान का अपना वजूद) अपनी क़ीमत या गहराई को नहीं जानता.... जब तक वह पूरी दुनिया के अनुभवों से गुज़रता नहीं है। यह एक गहरा अहसास है कि हमारी असली अहमियत अक्सर हमें खुद नहीं पता चलती, बल्कि हमें दुनिया की ज़मीन-आसमान दिखाती है।
