फ़लक ऐ काश हम को ख़ाक ही रखता कि इस में हम — मीर तक़ी मीर
“O sky, alas, if you kept us as dust, that in it we might be / The dust of the path, or the dust of the slipper's tread.”
अर्थ
हे आसमाँ, काश! कि तुम हमें धूल ही रख देते, ताकि हम इसमें राह की धूल या चप्पल के पैरों की धूल बन पाते।
विस्तार
यह शेर मिर्ज़ा तक़ी मीर साहब की रूहानी तड़प है... ये कहते हैं कि काश! वो बस किसी रास्ते का गुबार... या किसी जूती की धूल बनकर रह जाते। ये सिर्फ़ ग़ायब होने की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसी जगह की चाहत है... जहाँ उनका होना, बस एक मामूली सा गुबार बनकर रह जाए। यह उस दर्द को बयां करता है, जब अपनी पहचान का बोझ बहुत भारी हो जाए!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
