इलाही कैसे होते हैं जिन्हें है बंदगी ख़्वाहिश — मीर तक़ी मीर

इलाही कैसे होते हैं जिन्हें है बंदगी ख़्वाहिश हमें तो शर्म दामन-गीर होती है ख़ुदा होते

“How are those who are worshipped, whose desire is devotion, To us, the beggar's coffer is enough, when God is enough.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

इलाही कैसे होते हैं जिन्हें बंदगी की ख़्वाहिश है, हमें तो शर्म दामन-गीर ही काफ़ी है, जब ख़ुदा होते हैं।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ इश्क़ या भक्ति की बात नहीं करता, यह तो फ़लसफ़े की बात है। शायर यहाँ एक गहरे सवाल को उठा रहे हैं: क्या ख़ुदा को बंदगी की ख़्वाहिश होती है? शायर कहते हैं कि अगर ख़ुदा ही परम सत्य है, तो वह हमारी किसी चाहत या ज़रूरत से बंधा नहीं हो सकता। यह एहसास कि ईश्वर को किसी चीज़ की ज़रूरत है, स्वयं में एक कमी है। यह एक बहुत ही तफ़क्कुर (reflection) वाला शेर है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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