सरापा आरज़ू होने ने बंदा कर दिया हम को
वगर्ना हम ख़ुदा थे गर दिल-ए-बे-मुद्दआ होते
“To having a desire for oblivion, you have rendered us inert, Otherwise, we were God, were our hearts not abandoned.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
तुम्हारी अवांछित इच्छाओं के कारण हम निष्क्रिय हो गए; वरना, हम ईश्वर थे, अगर हमारे दिल उपेक्षित नहीं होते।
विस्तार
यह शेर चाहत (इश्क़) के बहुत गहरे असर को बयां करता है। शायर कहते हैं कि बस आरज़ू होने ने इंसान बना दिया है.... वरना वह ख़ुदा थे। इसका मतलब है कि जब तक दिल में कोई चाहत नहीं होती, तब तक इंसान अपने आप में पूर्ण होता है, लेकिन जैसे ही इश्क़ होता है, हम अपनी मर्ज़ी से 'इंसान' बन जाते हैं।
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