ब-रंग-ए-बू-ए-गुल उस बाग़ के हम आश्ना होते — मीर तक़ी मीर
ब-रंग-ए-बू-ए-गुल उस बाग़ के हम आश्ना होते
कि हमराह-ए-सबा टुक सैर करते फिर हवा होते
“The fragrance of the rose, we were familiar with that garden, / Where we used to wander, strolling with the gentle breeze.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
गुलाब की सुगंध से हम उस बाग़ से परिचित थे, जहाँ हम हवा के साथ सैर करते थे।
विस्तार
यह शेर एक गहरे जुड़ाव और सहजता को बयां करता है। शायर कहते हैं कि वे उस बाग़ की ख़ुशबू और रंगों से इतने वाकिफ़ थे... कि हवा को भी अपने साथ सैर करने का हमसफ़र मान लेते थे। यह एहसास किसी ऐसे रिश्ते का होता है, जो इतना स्वाभाविक हो कि माहौल का हर कण भी अपनापन महसूस कराए।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
1 / 7Next →
