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बहार अब के भी जो गुज़री क़फ़स में
तो फिर अपनी रिहाई हो चुकी बस

If another spring passes by within this cage, Then surely, my freedom will have arrived.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

यदि एक और बसंत इस पिंजरे से गुज़र जाए, तो बस मेरी मुक्ति हो चुकी होगी।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरी भावनात्मक आज़ादी की बात करता है। यहाँ 'क़फ़स' हमारी ज़िंदगी की बंदिशें, या कोई मजबूरी है। शायर कहते हैं कि अगर ये बहार, जो खूबसूरती का प्रतीक है, इन बंदिशों से गुज़र भी जाए, तो भी मेरा मन... मेरी रूह तो पहले ही आज़ाद हो चुकी है! यह वो एहसास है जब आप बाहरी दुनिया की नज़ाकत से बेपरवाह हो जाते हैं।

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