ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम निको याँ से — मीर तक़ी मीर

ग़म-ओ-रंज-ओ-अलम निको याँ से सब तुम्हारी ही मेहरबानी है

“From sorrow, grief, and pain, do not depart from here; all is due to your grace.”

— मीर तक़ी मीर

अर्थ

दुख, रंज और पीड़ा से, यहाँ से मत जाओ; यह सब तुम्हारी ही मेहरबानी है।

विस्तार

इस शेर में एक तरह का समर्पण है। शायर कह रहे हैं कि आप (या महबूब) ये ग़म, ये दर्द, ये रंज... ये सब छोड़ दीजिए। लेकिन सबसे बड़ी बात क्या है? शायर कहते हैं कि ये सब कुछ... आपकी मेहरबानी है। यानी, दर्द भी आपकी कृपा का हिस्सा है। यह प्रेम की उस गहराई को दिखाता है, जहाँ दर्द भी मीठा लगता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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