फिर भी करते हैं 'मीर' साहब इश्क़ — मीर तक़ी मीर
फिर भी करते हैं 'मीर' साहब इश्क़
हैं जवाँ इख़्तियार रखते हैं
“Yet, O Meer, you continue with love's pursuit, For you still possess the spirit of youth.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
फिर भी मीर साहब इश्क़ करते हैं क्योंकि वे अभी भी जवानी का जोश और उत्साह बनाए हुए हैं।
विस्तार
यह शेर उस इश्क़ की ज़िद को बयां करता है, जो मानने को तैयार नहीं होता। शायर कह रहे हैं कि चाहे कितनी भी वज़ह हो, चाहे हालात कुछ भी हों, दिल और जवाँ इख़्तियार (जवानी का हौसला) एक बार जो मोहब्बत कर ले, उसे छोड़ना मुमकिन नहीं। यह इश्क़ की उस अदम्य ताक़त का बयान है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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