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दीदनी है ग़रज़ ये सोहबत शोख़
रोज़-ओ-शब तरफ़ा माजरा है याँ

This is the desire to share company with the beautiful one, For life's journey, day and night, is a changing affair.

मीर तक़ी मीर
अर्थ

इस चंचल महबूब की सोहबत देखने लायक है। यहाँ दिन-रात एक अजीब और निराला तमाशा होता रहता है, जो हर पल हैरान करने वाला है।

विस्तार

यह शेर उस नशीली अदा का बयान है जो सिर्फ़ देखने में है। मिर्ज़ा तय़मिर कहते हैं कि इस ख़ूबसूरत महफ़िल का मक़सद तो बस 'देखना' है। यहाँ का माहौल ऐसा है कि दिन हो या रात, हर पल एक तमाशे जैसा लगता है। यह एहसास कि कभी-कभी बात करने से ज़्यादा मज़ा, बस निहारने में आ जाता है। बहुत ही गहरा और दिल को छू लेने वाला नज़रिया है।

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पाठ
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