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रिंद मुफ़्लिस जिगर में आह नहीं
जान महज़ूँ है और क्या है याँ

The heart is not in distress, there is no sigh in the soul, For the beloved is precious, and what else is there in this world?

मीर तक़ी मीर
अर्थ

एक कंगाल रिंद जिसके दिल में अब आह भरने की भी शक्ति नहीं बची; यहाँ अब एक दुखी और उदास जान के सिवा और कुछ भी शेष नहीं है।

विस्तार

यह शेर एक बहुत गहरे एहसास को बयान करता है। शायर कहते हैं कि जब दिल मुफ़्लिस और नशे में होता है, तो उसे किसी चीज़ की आह नहीं मिलती। वह एक गहरी समझ है... कि ज़िन्दगी अपने आप में ही कितनी महज़ूँ है। हमें बाहरी चीज़ों में नहीं, बल्कि अपनी इस सच्चाई को स्वीकार करने में सुकून मिलता है।

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