कैसे कैसे मकान हैं सुथरे
इक अज़ाँ जुमला कर्बला है याँ
“How many clean houses there are, / One is the whole of Karbala.”
— मीर तक़ी मीर
अर्थ
ये घर बाहर से देखने में कितने साफ-सुथरे और सुंदर लगते हैं। लेकिन यहाँ कही जाने वाली हर बात और हर शब्द में कर्बला जैसा असीम दुख और जीवन की बड़ी त्रासदियाँ छिपी हुई हैं।
विस्तार
यह शेर हमें बाहरी दिखावे और अंदरूनी सच्चाई के बीच के अंतर को समझाता है। शायर कहते हैं कि ये मकान कितने भी साफ-सुथरे क्यों न हों, लेकिन यहाँ जो अज़ाँ गूँज रही है, वह सिर्फ़ इबादत नहीं है। यह 'जुमला कर्बला' है! इसका मतलब है कि इस सुकून भरी दुनिया में भी, कहीं न कहीं एक गहरा ग़म, एक बलिदान की कहानी ज़िंदा है। यह शेर ज़िंदगी की विडंबना को दर्शाता है।
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