“All mankind craves dignity and worldly honor, O Lord; conceal me like a pearl within the oyster shell of the grave.”
हे ईश्वर! सारी दुनिया मान-सम्मान और शोहरत की चाह रखती है, लेकिन तू मुझे क़ब्र रूपी सीप में एक मोती की तरह छुपा ले।
जहाँ पूरी दुनिया नाम, शोहरत और दुनियावी इज़्ज़त के पीछे भाग रही है, वहीं शायर ख़ुदा से बिल्कुल जुदा दरख़्वास्त करता है। वह इस शोर-शराबे से दूर क़ब्र की ख़ामोशी में छुप जाना चाहता है, ठीक वैसे जैसे एक सीप अपने अंदर अनमोल मोती को दुनिया की नज़रों से छुपाकर महफ़ूज़ रखती है। यहाँ क़ब्र कोई ख़ौफ़नाक मंज़र नहीं, बल्कि रूह के असली वक़ार और पाकीज़गी को बचाए रखने की एक पुरसुकून पनाहगाह बन जाती है।
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