“O fate, cast out the ill-starred from the garden in such a way / That at least a few blossoms rest in their hem, like a shield.”
ऐ तक़दीर, बदनसीबों को बाग़ से इस तरह बाहर निकाल कि कम से कम कुछ फूल तो उनके दामन में ढाल की तरह हिफ़ाज़त के लिए मौजूद रहें।
शायर यहाँ तक़दीर के फ़ैसले को कुबूल करते हुए एक बेहद मार्मिक गुज़ारिश करता है। वह कहता है कि ऐ आसमाँ, अगर हमें ख़ुशियों के इस बाग़ से निकालना ही है, तो इतनी मोहलत ज़रूर दे कि हम दामन में चंद फूल समेट सकें। ये चन्द फूल दरअस्ल वो हसीन यादें हैं, जो बाहर की बेरहम दुनिया में ज़ख़्मों से बचने के लिए हमारे वास्ते ढाल का काम कर सकें।
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