उन्हीं को आज नहीं बैठने की जा मिलती मुआ'फ़ करते थे जो लोग कल ज़मीनों को

“Today, they cannot find even a place to sit and rest / Those who, but yesterday, granted vast lands at their behest.”

— मीर अनीस
अर्थ

आज उन्हीं लोगों को बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है, जो कल दूसरों को बड़ी-बड़ी ज़मीनें बख़्श (माफ़) दिया करते थे।

विस्तार

यह शेर वक़्त के बेरहम फेर और ज़िंदगी की नश्वरता की एक दर्दनाक तस्वीर पेश करता है। जो लोग कभी इतने बड़े रईस या हुक्मरान थे कि दूसरों को ज़मीनें बख़्श दिया करते थे, आज गर्दिश-ए-दौराँ ने उन्हें इस मोड़ पर ला खड़ा किया है कि उनके पास बैठने तक की जगह नहीं बची। यह बात हमें बहुत सादगी से सिखाती है कि रुतबा और दौलत हमेशा रहने वाले नहीं हैं, और वक़्त किसी का भी पासा कभी भी पलट सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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