कोई अनीस कोई आश्ना नहीं रखते किसी की आस बग़ैर अज़ ख़ुदा नहीं रखते

“No companion do I keep, no familiar friend beside; except in God alone, in no one does my hope abide.”

— मीर अनीस
अर्थ

हम किसी को अपना साथी या परिचित नहीं बनाते, और ईश्वर के सिवा किसी और से कोई उम्मीद नहीं रखते हैं।

विस्तार

यह शेर एक ऐसी रूहानी तन्हाई की बात करता है जो बेबसी या मायूसी से नहीं, बल्कि गहरे यक़ीन और खुददारी से पैदा होती है। शायर ने दुनियावी रिश्तों और उनकी खोखली उम्मीदों से खुद को इसलिए अलग कर लिया है ताकि दिल किसी इंसान का मोहताज न रहे। जब सारी तवक्क़ो सिर्फ़ ख़ुदा से जुड़ जाती है, तो गै़रों के छूटने का मलाल नहीं रहता और इंसान एक सुकून भरी आज़ादी महसूस करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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