“All the pleasures were had, night after night,And its sorrow came, morning after morning.”
सारी मौज-मस्ती रातों-रात होती थी, और उसका संताप सुबह-सुबह आता था।
यह दोहा जीवन के एक मीठे-कड़वे पहलू को बड़ी खूबसूरती से दर्शाता है। यह कहता है कि सारी खुशियाँ, मौज-मस्ती और शायद कुछ गुप्त आनंद रात के समय में थे। लेकिन जैसे ही सुबह होती है, वही आनंद एक तरह के दुख, पछतावे या फिर उन पलों के नतीजों की भारी सच्चाई में बदल जाता है। यह खुशी की क्षणभंगुर प्रकृति को बताता है जो अक्सर एक कीमत पर आती है। यह हमें याद दिलाता है कि रात की गर्माहट कितनी जल्दी सुबह की ठंडी हकीकत में बदल सकती है। यह भोग-विलास की क्षणिक प्रकृति और उसके बाद आने वाले परिणामों पर एक मार्मिक विचार है।
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