“The knocks on my finger remained, unheard at the door,May no closed door show such hesitation evermore.”
दस्तक देने का प्रयास उंगली में ही रुक गया, अर्थात संकोच के कारण दरवाज़े तक आवाज़ नहीं पहुँच पाई। कवि कामना करता है कि कोई भी बंद दरवाज़ा इतनी झिझक या हिचकिचाहट कभी न दिखाए।
यह ख़ूबसूरत शेर हमें संकोच की दुविधा बताता है। यह उस व्यक्ति की तस्वीर खींचता है जो एक बंद दरवाज़े पर दस्तक देने आता है, पर ऐन वक़्त पर रुक जाता है। 'आँगुली में टकोरा रह जाना' बताता है कि दरवाज़ा खटखटाने का इरादा तो था, पर हिचकिचाहट के कारण वो बात अधूरी रह गई। शायर अफ़सोस जताते हैं कि ऐसी झिझक किसी भी दरवाज़े को बंद न रहने दे। यह हमें याद दिलाता है कि हमारी अपनी ही हिचक या शर्म अक्सर हमें पहला क़दम उठाने से रोक देती है। यह हमें अपने संकोच से उबरने की प्रेरणा देता है, क्योंकि अक्सर एक मौका या रिश्ता बस एक दस्तक दूर होता है, और झिझक एक अदृश्य दीवार बन जाती है।
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