ऐ नसीम-ए-सहर तिरी दौलत ग़ुंचा-ए-दिल कसू का वा न हुआ

“O morning breeze, despite all your grace, the bud of no heart could ever bloom.”

— ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
अर्थ

हे सुबह की हवा, तेरे प्रभाव और कृपा के बावजूद किसी के भी दिल की कली खिल न सकी।

विस्तार

उर्दू शायरी में सुबह की ठंडी हवा यानी 'नसीम-ए-सहर' को बंद कलियों को महकाने और खिलाने वाला माना गया है। मगर शायर एक गहरे दर्द के साथ कहता है कि इस हवा के पास इतनी बख़्शिश और ताक़त होने के बावजूद, किसी के दिल की कली आज तक न खिल सकी। यह शेर कुदरत के जादू और इंसानी दिल की कभी न मिटने वाली उदासी के बीच का एक बेहद मार्मिक फ़र्क बयां करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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